Mon March 2010 at 1:47pm
बेपनाह मुहब्बत है उनसे,
कि अब रहा नहीं जाता,
नाज़ुक लब रुसवा हों हमसे,
ये अब सहा नहीं जाता |
महफ़िल में खुद हैं अकेले,
कि अब रहा नहीं जाता,
तन्हाई में कट जाएँ रातें,
ये अब सहा नहीं जाता |
हमसफ़र हमकदम नहीं, सोचकर,
अब रहा नहीं जाता,
दर्द-ए जुदाई का ग़म,
अब सहा नहीं जाता |
सिर्फ उनकी यादों के सहारे ही,
अब रहा नहीं जाता,
न मिलने कि जिद और बेरुखापन,
अब सहा नहीं जाता |
दिल के जज़्बात निकले दिल से,
कि अब रहा नहीं जाता,
इस बेमुरव्वत जिंदगी में,
जीने कि मजबूरी को,
अब सहा नहीं जाता ||
"रोहिणी संकलन" से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
rohini ji ye matra kalpna hai ya iska kuchh aadhaar bhi hai.....???
ReplyDeleteji nahin.....ye sirf meri kalpna hai....!!!
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