Friday, March 19, 2010 at 10:21pm
खुश्क निगाहों में ये किसका तसव्वुर है,
जो छुपा बैठा है कहीं कोने में दिल के,
नज़रें इनायत होती तो पता चलता,
हम भी बैठे थे इंतज़ार में |
काश उनका दीदार कहीं हो जाता हमको,
तो एहसास ये दिल का मिट जाता थोड़ा,
तमन्ना-ए खन्जर जो चलाया था कभी,
छोड़ आये उसको मझधार में |
हूक उठी जब सीने में कहीं मेरे,
काबिल नहीं इस क़दर जी सकें हम,
घुट-घुट के रहना गवारा नहीं अब तो,
काटे कटे न पल इस जहान में |
सोचा था ज़बां साथ न दे तो क्या,
आगोश में तो थाम ही लोगे हमको,
मगर खुशकिस्मत नहीं हैं इतने भी,
दिल जीत लें जो ऐतबार में |
रोहिणी संकलन से एक रचना...............ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क करें || rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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