Monday, March 8, 2010 at 3:29pm
जिंदगी मोहताज है मंजिल की,
मंजिल ही रास्ता तय करता है,
मंजिल है तो मज़ा है सफ़र का,
वरना सफ़र बेजान सा कटता है |
बेवफा न कह के बदनाम कर,
यूँ अपने आप को, कुछ नाम कर,
ज़ख्मों के निशां तो मिट जायेंगे,
वफ़ा की उम्मीद में कुछ तो काम कर
ये मत सोच कि जो तन्हाई है,
तेरे लिए वो दर्द-ए जुदाई है,
ये उसी कि मेहरबानी है,
जो तुझे अपनों तक खींच लाई है,
एहसास एक बंधन है, जो दिलों को जोड़ देता है,
भूलने का ख़याल ही मन को झिंझोड़ देता है,
नाज़ुक समझने की इसे भूल न करना तुम,
वक़्त आने पर तो ये दामन भी छोड़ देता है |
रोहिणी संकलन से एक रचना...........ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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