Sat 20th March 2010 at 10:37am |
यादों की चिलमन से झाँका किसी ने जब,
मन ये सराबोर होने लगा तब,
बदन मेरा गीला हुआ था पसीने से,
मानो उंडेला हो पानी किसी ने तब |
ऐ दिल तू देना गवाही मेरी जब,
उसे रूह ढूंढे ये प्यासी तड़प तब,
समझ जायेंगे वो किया था बदी ने,
इशारा नसीबा हमारा था खोटा तब |
धुंधला सा साया समेटा था सीने में,
चल दी थी लेकर उसे दूर मै जब,
पर क्या करूं मौत ने रुख ये पलटा,
तब्दील थी कब्र में क़ैद मैं तब |
की थी लाख कोशिश उन्हें ये बताने की,
हम हैं नहीं इस जहाँ में क्या ग़म तब,
मगर देख हैरां हुए हम ने जाना ये,
थे हाथ थामे वहीँ वो खड़े जब |
रोहिणी संकलन से एक रचना..........ये रचना रोहिणी की निजी संपत्ति है, प्रकाशित करने से पहले कृपया संपर्क कर अनुमति लें|| rohinisnegi@gmail.com/rohininegi@yahoo.com
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